मैं ही गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी शरण, निवास, सुहृद मैं ही। मैं उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान नित्य बीज मैं ही।। मैं ही मेघ रोकता, तपता, मैं ही बरसाता हूँ वृष्टि। मैं ही अमृत, मृत्यु भी मैं ही, सदसत् मैं ही सारी सृष्टि।। (श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार) श्रीभगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं- ‘हे अर्जुन! मेरे अतिरिक्त दूसरी कोई भी वस्तु नहीं है। माला के सूत्र में पिरोये हुए मणियों के समान यह समस्त ब्रह्माण्ड मुझमें पिरोया हुआ है।’ (७।७) ‘मैं ही गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, शरण, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, सबका आधार, निधान तथा अविनाशी कारण हूँ।’ (१४।२७)
तैत्तिरीयोपनिषद् (२।६) में कहा गया है कि उस परमेश्वर ने विचार किया कि मैं प्रकट हो जाऊँ (अनेक नाम-रूप धारणकर बहुत हो जाऊँ), इस स्थिति में एक ही परमात्मा अनेक नाम-रूप धारणकर सृष्टि की रचना करते हैं। श्रीमद्भागवत (४।७।५०) में भगवान कहते हैं-’मैं ही सम्पूर्ण सृष्टि की रचना करता हूँ। मैं ही उसका मूल कारण हूँ।’
@@DrOmDuttAcharya तुमने भी वही वाली बात कर दी कि देवी देवता भगवान ईश्वर सब एक ही है फिर तो अलग-अलग तो कुछ होता ही नहीं उसी के सभी नाम हैं ईश्वर अलग है देवी देवता अलग है ईश्वर को पूजा की जरूरत नहीं है देवी देवताओं की पूजा होती है पूजा मतलब सेवा अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग देवी-देवताओं की अलग-अलग पूजा होती है
Ishwar ek hai Devi devta bahut sare he. Devi devta Bhagwan ke category me aate he. Parmeswar nirakar he. aur Ek hai. parmeswar ki jo ansh shakti he wo bhagwan he
ईश्वर देवी देवता अलग-अलग होते हैं ईश्वर अलग है देवी देवता अलग हैं ईश्वर की पूजा नहीं होती देवी देवताओं की पूजा होती है पूजा मतलब सेवा अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग देवी-देवताओं की अलग-अलग पूजा होती है वहां पर मूर्ति पत्थर रख लेते हैं जहां पूजा देवी देवताओं की होती है
Shri krishna ji geeta ji me kehte hain..mai apni yog maya se apna rup rachta hu aur apni yog maya se apne rup ko dhak leta hu..aur murkh log meri is bat pe hanste hain..it means god sakar b hai aur nirakar b..wo khudko sakar b bana.leta hai aur nirakar b
vah sarv sakti maan hai...bhramand ki urjja agar hum kisi simit daire me band karna cahenge toh vo bhraman nhi rah jayga... baat ki gahrai ko apko samajhna hoga... jo annant hai vo annt nhi hota...Shri Krishna ji ke bare me ye baatey aapne kisi T-Series ki cd se sun kr aap ishwar ko simit nhi kr sakte...
Namaste Acharya ji...🙏🏻 kuch taamo Gun me lipt log apke is gyan ko ghran karne layak nhi... ve bina gyan v tark ke apni baat ko rakhte hai... kuch gyani log hai lakin unhe ye malum nhi unhone jo padha hai vo kitna sahi hai qki vo simit dairey me apna addhyapan kiya hai... ve ishwar se pana cahtey hai ,,, ishwar ko pana nhi cahtey...
Main jo bhi kuchh bol Raha Hun vah isliye nahin bol raha hun ke log use pasand kare,,, balki isliye bol raha hun kyuki Satya ko Satya kahana Mera kartavya hai. Esey Koi sune aalochana Karen ya nahin kare issey Mera koi matlab nahin.
आपकी आवाज साफ तरीके से नहीं प्राप्त हो रही है कृपया करके एक अच्छा सा माइक प्रयोग करें ताकि हमें आपकी आवाज स्पष्ट सुनाई दे और आपकी बातें हमें स्पष्ट समझ में आए हमें यह महसूस हुआ इसलिए हमने कमेंट क्या है आशा करते हैं कि आप इसमें सुधार करेंगे
गुरुजी पहले आप मुझे यह बताइए कि आप साकार है कि निराकार मुझे पता है कि आपका जवाब साकार होगा, अगर मैं आपसे यह पूछूं कि आपके अंदर जो जीव आत्मा है वह क्या है पूर्ण रूप से निराकार तो आप अपने आप को साकार कैसे कह रहे हैं😂 जिस प्रकार जीवात्मा निराकार से साकार रूप में परिवर्तित होकर हमारे शरीर को चलाती है उसी प्रकार ईश्वर निराकार से साकार रूप में परिवर्तित होते हैं, सृष्टि पांच तत्वों से बनी है इसका प्रथम तत्व निराकार है सभी तत्व मिलकर एक साकार रूप धारण किए हैं और सृष्टि के कण-कण में ईश्वर है। ईश्वर को हम सर्वशक्तिमान भी कहते है अगर वह सर्वशक्तिमान है तो क्या वह साकार रूप में परिवर्तित नहीं हो सकता अगर आप उसे निराकार कहते है तो आप उसे सर्वशक्तिमान नहीं मानते। वह ईश्वर है बलवान है वह कुछ भी कर सकता है वह दिव्य है और उनकी लीला भी दिव्य है, जो मूर्ख होते है वह उनकी दिव्य लीला को नहीं समझ पाते है। इसीलिए भगवान श्री कृष्ण भगवद् गीता में कहे है :- हे पार्थ! मैं सम्पूर्ण इन्द्रियोंके विषयोंको जाननेवाला हूं परंतु वास्तवमें सब इन्द्रियोंसे रहित हूं तथा आसक्तिरहित होनेपर भी सबका धारण-पोषण करनेवाला और निर्गुण होनेपर भी गुणोंको भोगनेवाला हूं। 🙏Jai prabhu shree krishn🙏
Nirakarbadi kiya samjhayega iswar ke swarup ko nirakar ko manne wale gyani kahlata hai lekin geeta me vastwik gyani ka barnan hai Krishna kahte hai anek janmo ke ant me basudev ki saran grahn karte hai kintu jo log duskriti mud naradham mayaphrit gyana ashurvavamashrita log hai we kabhi bhagwan ki saran nahi lete chahe ye log ved pade ya kuch vi kare vedo ke dawara krisn ko janna hai ved ke rachnakarnewale krisn kintu ved me inko kahi vi krisn dikhayee nahi dete aise logo ko mayabadi kahte hai or unke phylosphy ko mayabadi philosophy kahte hai bharat me sankracharya inke Acharya the unhone ved ke vastwik gyan ko chhupa diya or kalpit bhasya kiya asaad sastra ki rachna kar nirakarbad ka prachar kiya isliye sarvatra nirakar ka bol bola hai bhagwan sankar kahte hai parvati se ki jo log nirakarbad pravachan sunega uska sarvnas ho jayega vaisnav ya pramanik pramprawala guru se hi gyan lena chahiye sankracharya ne sakar upasna kiye lekin phylosphy mayabad diye kiyoki aisa hi Krishna ki agya thi atah sankracharya doshi nahi hai
Agar parmatma ka koi sakar swaroop nahin hai tho kyun koi v aajtak mahadeev ka sthan kailash parvat par chadhai nahin kar paya, main bataun, kyun ki wahan sakchat mere bholenath ka vash hai. Agar isska apke pass koi jabab hai tho video zaroor banaiyega iss baare me. Har Har Mahadeev
or ye apko pata kaha se chala Amar Ujjala ya Danik Jagran se? bina tathy ki baat subham ji .. is gyan ko samajhne ke liy apni samajh ka daira badhani ki jarurat hai.
Vedo me likha hai mahadev ke tin netr hai agr bhagvan sakar nhi to tin netr kaha se aay bevkuf banana band kre eshver nirakar sakar dono hai Geeta me bhi likha hai
Namaskar guru ji
Sattyasatani vedic dharma ki Jay
त्र्यम्बकम् कौन है फिर भगवान सिवा हि त्र्यम्बक् है
अत्यन्त सुन्दर विचार ।
🙏🙏🙏🙏
गुरु जी सादर प्रणाम
shes narayan akinchan om om om ati uttam aur gyanvardhak jankari. acharya ji sadar pranam namaste.
मैं ही गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी शरण, निवास, सुहृद मैं ही।
मैं उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान नित्य बीज मैं ही।।
मैं ही मेघ रोकता, तपता, मैं ही बरसाता हूँ वृष्टि।
मैं ही अमृत, मृत्यु भी मैं ही, सदसत् मैं ही सारी सृष्टि।। (श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार)
श्रीभगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं-
‘हे अर्जुन! मेरे अतिरिक्त दूसरी कोई भी वस्तु नहीं है। माला के सूत्र में पिरोये हुए मणियों के समान यह समस्त ब्रह्माण्ड मुझमें पिरोया हुआ है।’ (७।७)
‘मैं ही गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, शरण, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, सबका आधार, निधान तथा अविनाशी कारण हूँ।’ (१४।२७)
Guru ji Namaskar
OM
Hari om Namah shivaya
तैत्तिरीयोपनिषद् (२।६) में कहा गया है कि उस परमेश्वर ने विचार किया कि मैं प्रकट हो जाऊँ (अनेक नाम-रूप धारणकर बहुत हो जाऊँ), इस स्थिति में एक ही परमात्मा अनेक नाम-रूप धारणकर सृष्टि की रचना करते हैं। श्रीमद्भागवत (४।७।५०) में भगवान कहते हैं-’मैं ही सम्पूर्ण सृष्टि की रचना करता हूँ। मैं ही उसका मूल कारण हूँ।’
Guru jee aajkal darshan kyon nhi de rhe hain, video upload kar vedic gyan dete rahen
दो दिन बाद डालूंगा ,
@@DrOmDuttAcharya तुमने भी वही वाली बात कर दी कि देवी देवता भगवान ईश्वर सब एक ही है फिर तो अलग-अलग तो कुछ होता ही नहीं उसी के सभी नाम हैं ईश्वर अलग है देवी देवता अलग है ईश्वर को पूजा की जरूरत नहीं है देवी देवताओं की पूजा होती है पूजा मतलब सेवा अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग देवी-देवताओं की अलग-अलग पूजा होती है
Bilkul theek kha apne ye bat sabhi hinduo ko samzni chahiye ek ishaw k alawa koi nhi pujniy
Ishwar ek hai Devi devta bahut sare he.
Devi devta Bhagwan ke category me aate he.
Parmeswar nirakar he.
aur Ek hai.
parmeswar ki jo ansh
shakti he wo bhagwan he
आचार्य जी नमस्ते। आपसे निवेदन है कि होली के पर्व पर भी थोड़ा सा प्रकाश डालिए। होली क्या है और इसका हमारे जीवन में क्या महत्व है।
ईश्वर देवी देवता अलग-अलग होते हैं ईश्वर अलग है देवी देवता अलग हैं ईश्वर की पूजा नहीं होती देवी देवताओं की पूजा होती है पूजा मतलब सेवा अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग देवी-देवताओं की अलग-अलग पूजा होती है वहां पर मूर्ति पत्थर रख लेते हैं जहां पूजा देवी देवताओं की होती है
Shri krishna ji geeta ji me kehte hain..mai apni yog maya se apna rup rachta hu aur apni yog maya se apne rup ko dhak leta hu..aur murkh log meri is bat pe hanste hain..it means god sakar b hai aur nirakar b..wo khudko sakar b bana.leta hai aur nirakar b
vah sarv sakti maan hai...bhramand ki urjja agar hum kisi simit daire me band karna cahenge toh vo bhraman nhi rah jayga... baat ki gahrai ko apko samajhna hoga... jo annant hai vo annt nhi hota...Shri Krishna ji ke bare me ye baatey aapne kisi T-Series ki cd se sun kr aap ishwar ko simit nhi kr sakte...
Namestay gurudev
Namaste Acharya ji...🙏🏻 kuch taamo Gun me lipt log apke is gyan ko ghran karne layak nhi... ve bina gyan v tark ke apni baat ko rakhte hai... kuch gyani log hai lakin unhe ye malum nhi unhone jo padha hai vo kitna sahi hai qki vo simit dairey me apna addhyapan kiya hai... ve ishwar se pana cahtey hai ,,, ishwar ko pana nhi cahtey...
Main jo bhi kuchh bol Raha Hun vah isliye nahin bol raha hun ke log use pasand kare,,, balki isliye bol raha hun kyuki Satya ko Satya kahana Mera kartavya hai. Esey Koi sune aalochana Karen ya nahin kare issey Mera koi matlab nahin.
आपकी आवाज साफ तरीके से नहीं प्राप्त हो रही है कृपया करके एक अच्छा सा माइक प्रयोग करें ताकि हमें आपकी आवाज स्पष्ट सुनाई दे और आपकी बातें हमें स्पष्ट समझ में आए हमें यह महसूस हुआ इसलिए हमने कमेंट क्या है आशा करते हैं कि आप इसमें सुधार करेंगे
Aur geeta ji me krishna ji ye b kehte hai ki maine hi vedo ki rachna ki hai aur vedo k dwara mujehi jana jata hai
गुरुजी पहले आप मुझे यह बताइए कि आप साकार है कि निराकार मुझे पता है कि आपका जवाब साकार होगा, अगर मैं आपसे यह पूछूं कि आपके अंदर जो जीव आत्मा है वह क्या है पूर्ण रूप से निराकार तो आप अपने आप को साकार कैसे कह रहे हैं😂 जिस प्रकार जीवात्मा निराकार से साकार रूप में परिवर्तित होकर हमारे शरीर को चलाती है उसी प्रकार ईश्वर निराकार से साकार रूप में परिवर्तित होते हैं, सृष्टि पांच तत्वों से बनी है इसका प्रथम तत्व निराकार है सभी तत्व मिलकर एक साकार रूप धारण किए हैं और सृष्टि के कण-कण में ईश्वर है। ईश्वर को हम सर्वशक्तिमान भी कहते है अगर वह सर्वशक्तिमान है तो क्या वह साकार रूप में परिवर्तित नहीं हो सकता अगर आप उसे निराकार कहते है तो आप उसे सर्वशक्तिमान नहीं मानते। वह ईश्वर है बलवान है वह कुछ भी कर सकता है वह दिव्य है और उनकी लीला भी दिव्य है, जो मूर्ख होते है वह उनकी दिव्य लीला को नहीं समझ पाते है। इसीलिए भगवान श्री कृष्ण भगवद् गीता में कहे है :-
हे पार्थ! मैं सम्पूर्ण इन्द्रियोंके विषयोंको जाननेवाला हूं परंतु वास्तवमें सब इन्द्रियोंसे रहित हूं तथा आसक्तिरहित होनेपर भी सबका धारण-पोषण करनेवाला और निर्गुण होनेपर भी गुणोंको भोगनेवाला हूं।
🙏Jai prabhu shree krishn🙏
Nirakarbadi kiya samjhayega iswar ke swarup ko nirakar ko manne wale gyani kahlata hai lekin geeta me vastwik gyani ka barnan hai Krishna kahte hai anek janmo ke ant me basudev ki saran grahn karte hai kintu jo log duskriti mud naradham mayaphrit gyana ashurvavamashrita log hai we kabhi bhagwan ki saran nahi lete chahe ye log ved pade ya kuch vi kare vedo ke dawara krisn ko janna hai ved ke rachnakarnewale krisn kintu ved me inko kahi vi krisn dikhayee nahi dete aise logo ko mayabadi kahte hai or unke phylosphy ko mayabadi philosophy kahte hai bharat me sankracharya inke Acharya the unhone ved ke vastwik gyan ko chhupa diya or kalpit bhasya kiya asaad sastra ki rachna kar nirakarbad ka prachar kiya isliye sarvatra nirakar ka bol bola hai bhagwan sankar kahte hai parvati se ki jo log nirakarbad pravachan sunega uska sarvnas ho jayega vaisnav ya pramanik pramprawala guru se hi gyan lena chahiye sankracharya ne sakar upasna kiye lekin phylosphy mayabad diye kiyoki aisa hi Krishna ki agya thi atah sankracharya doshi nahi hai
Parmatma nirakar v hain or sakaar v, parmatma ke saare lilaon par aap paani fer denge sir
lilaon se apka kya matlab hai?
Agar parmatma ka koi sakar swaroop nahin hai tho kyun koi v aajtak mahadeev ka sthan kailash parvat par chadhai nahin kar paya, main bataun, kyun ki wahan sakchat mere bholenath ka vash hai. Agar isska apke pass koi jabab hai tho video zaroor banaiyega iss baare me. Har Har Mahadeev
or ye apko pata kaha se chala Amar Ujjala ya Danik Jagran se? bina tathy ki baat subham ji .. is gyan ko samajhne ke liy apni samajh ka daira badhani ki jarurat hai.
Veri nice Guru jee...As a muslim the same is written in Quran, Bible and Hebrew....The God is one and worship only one God...
Vedo me likha hai mahadev ke tin netr hai agr bhagvan sakar nhi to tin netr kaha se aay bevkuf banana band kre eshver nirakar sakar dono hai Geeta me bhi likha hai
Appko ved Padhne cahiye usme asa kuch nhi likha
@@DrOmDuttAcharya 👍
Agar apne aap ko itna hi gyani manteho tho aap, tho ye bataiye kailash parvat par koi v aajtak chadhai kyun nahin kar paya
Thoda search karle bhai woh ek pyramid hai aur prakrutik nahi lagta. Dusri baat ki uspe koi nahi chadha galat hai
Pehle atmagyan prapt karlijiye, parmatma ji ka gyan aapne aap aajaega
Parmatma ki tarah gyan ki v koi seema nahin hai, aap ko v thodi gyan ki aavasyakta hai
Subham nag .... too app khena charhe ho ki apko inse jyada gyan h
🙏🙏🙏🙏